الجامع لأحكام القرآن/سورة البقرة/الآية رقم 79

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الجامع لأحكام القرآنسورة البقرة
الآية رقم 79
القرطبي


الآية رقم 79


الآية: 79 { فَوَيْلٌ لِلَّذِينَ يَكْتُبُونَ الْكِتَابَ بِأَيْدِيهِمْ ثُمَّ يَقُولُونَ هَذَا مِنْ عِنْدِ اللَّهِ لِيَشْتَرُوا بِهِ ثَمَناً قَلِيلاً فَوَيْلٌ لَهُمْ مِمَّا كَتَبَتْ أَيْدِيهِمْ وَوَيْلٌ لَهُمْ مِمَّا يَكْسِبُونَ }

فيه خمسة مسائل:

الأولى: قوله تعالى: { فَوَيْلٌ } اختلف في "الويل" ما هو، فروى عثمان بن عفان عن النبي ﷺ أنه جبل من نار. وروى أبو سعيد الخدري أن الويل واد في جهنم بين

جبلين يهوي فيه الهاوي أربعين خريفا. وروى سفيان وعطاء بن يسار: أن الويل في هذه الآية واد يجري بفناء جهنم من صديد أهل النار. وقيل: صهريج في جهنم. وحكى الزهراوي عن آخرين: أنه باب من أبواب جهنم. وعن ابن عباس: الويل المشقة من العذاب. وقال الخليل: الويل شدة الشر. الأصمعي: الويل تفجع وترحم. سيبويه: ويل لمن وقع في الهلكة، وويح زجر لمن أشرف على الهلكة. ابن عرفة: الويل الحزن: يقال: تويل الرجل إذا دعا بالويل، وإنما يقال ذلك عند الحزن والمكروه، ومنه قوله: { فَوَيْلٌ لِلَّذِينَ يَكْتُبُونَ الْكِتَابَ بِأَيْدِيهِمْ } [1]. وقيل: أصله الهلكة، وكل من وقع في هلكة دعا بالويل، ومنه قوله تعالى: { يَا وَيْلَتَنَا مَالِ هَذَا الْكِتَابِ } [2]. وهي الويل والويلة، وهما الهلكة، والجمع الويلات، قال:

له الويل إن أمسى ولا أم هاشم

وقال أيضا:

فقالت لك الويلات إنك مرجلي

وارتفع "ويل" بالابتداء، وجاز الابتداء به وإن كان نكرة لأن فيه معنى الدعاء. قال الأخفش: ويجوز النصب على إضمار فعل، أي ألزمهم الله ويلا. وقال الفراء: الأصل في الويل "وي" أي حزن، كما تقول: ويل لفلان، أي حزن له، فوصلته العرب باللام وقدروها منه فأعربوها. والأحسن فيه إذا فصل عن الإضافة الرفع، لأنه يقتضي الوقوع. ويصح النصب على معنى الدعاء، كما ذكرنا

قال الخليل: ولم يسمع على بنائه إلا ويح وويس وويه وويك وويل وويب، وكله يتقارب في المعنى. وقد فرق بينها قوم، وهي مصادر لم تنطلق العرب منها بفعل. قال الجرمي: ومما ينتصب انتصاب المصادر ويله وعوله وويحه وويسه، فإذا أدخلت اللام رفعت فقلت: ويل له، وويح له

الثانية: قوله تعالى: { لِلَّذِينَ يَكْتُبُونَ } الكتابة معروفة. وأول من كتب بالقلم وخط به إدريس عليه السلام، وجاء ذلك في حديث أبي ذر، خرجه الآجري وغيره. وقد قيل: إن آدم عليه السلام أعطي الخط فصار وراثة في ولده.

الثالثة: قوله تعالى: { بِأَيْدِيهِمْ } تأكيد، فإنه قد علم أن الكتب لا يكون إلا باليد، فهو مثل قوله: { وَلا طَائِرٍ يَطِيرُ بِجَنَاحَيْهِ } [3]، وقوله: { يَقُولُونَ بِأَفْوَاهِهِمْ } [4]. وقيل: فائدة "بأيديهم" بيان لجرمهم وإثبات لمجاهرتهم، فإن من تولى الفعل أشد مواقعة ممن لم يتوله وإن كان رأيا له وقال ابن السراج: "بأيديهم" كناية عن أنهم من تلقائهم دون أن ينزل عليهم، وإن لم تكن حقيقة في كتب أيديهم.

الرابعة: في هذه الآية والتي قبلها التحذير من التبديل والتغيير والزيادة في الشرع، فكل من بدل وغير أو ابتدع في دين الله ما ليس منه ولا يجوز فيه فهو داخل تحت هذا الوعيد الشديد، والعذاب الأليم، وقد حذر رسول الله ﷺ أمته لما قد علم ما يكون في آخر الزمان فقال: " ألا إن من قبلكم من أهل الكتاب افترقوا على اثنتين وسبعين ملة وإن هذه الأمة ستفترق على ثلاث وسبعين فرقة كلها في النار إلا واحدة" الحديث، وسيأتي. فحذرهم أن يحدثوا من تلقاء أنفسهم في الدين خلاف كتاب الله أو سنته أو سنة أصحابه فيضلوا به الناس، وقد وقع ما حذره وشاع، وكثر وذاع، فإنا لله وإنا إليه راجعون.

الخامسة: قوله تعالى: { لِيَشْتَرُوا بِهِ ثَمَناً قَلِيلاً } وصف الله تعالى ما يأخذونه بالقلة، إما لفنائه وعدم ثباته، وإما لكونه حراما، لأن الحرام لا بركة فيه ولا يربو عند الله. قال ابن إسحاق والكلبي: كانت صفة رسول الله ﷺ في كتابهم ربعة أسمر، فجعلوه آدم سبطا طويلا، وقالوا لأصحابهم وأتباعهم: انظروا إلى صفة النبي - ﷺ - الذي يبعث في آخر الزمان ليس يشبهه نعت هذا، وكانت للأحبار والعلماء رياسة ومكاسب، فخافوا إن بينوا أن تذهب مآكلهم ورياستهم، فمن ثم غيروا.

قوله تعالى: { فَوَيْلٌ لَهُمْ مِمَّا كَتَبَتْ أَيْدِيهِمْ وَوَيْلٌ لَهُمْ مِمَّا يَكْسِبُونَ } قيل من المآكل. وقيل من المعاصي. وكرر الويل تغليظا لفعلهم.

هامش

  1. [البقرة: 79]
  2. [الكهف: 49]
  3. [الأنعام: 38]
  4. [آل عمران: 167]
الجامع لأحكام القرآن - سورة البقرة
مقدمة السورة | 1 | 2 | 3 | أقوال العلماء في حكم الجلوس الأخير في الصلاة | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | أقوال العلماء في إمساك النبي عن قتل المنافقين | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | الآية رقم21 | 22 | 23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 | طرق ما يكون به الإمام إماما | شرائط الإمام | 31 | 32 | 33 | 34 | 35 | 36 | 37 | 38 | 39 | 40 | 41 | 42 | 43 | 44 | 45 | 46 | 47 | 48 | 49 | 50 | مسألة الاختلاف في يوم عاشوراء | فضل صيام يوم عاشوراء | 51 | 52 | 53 | 54 | 55 | 56 | 57 | 58 | 59 | 60 | 61 | 62 | 63 | القول في سبب رفع الطور | 64 | 65 | 66 | 67 | مسألة الدليل على منع الاستهزاء بدين الله ودين المسلمين ومن يجب تعظيمه | 68 | 69 | 70 | 71 | مسألة الدليل على حصر الحيوان بصفاته وجواز السلم فيه بذلك | 72 | 73 | مسألة القول بالقسامة بقول المقتول دمي عند فلان أو فلان قتلني | مسألة اختلاف العلماء في الحكم بالقسامة | مسألة الاختلاف في وجوب القود بالقسامة | مسألة الموجب للقسامة اللوث ولا بد منه | مسألة الاختلاف في القتيل بوجد في المحلة التي أكراها أربابها | مسألة لا يحلف في القسامة أقل من خمسين يمينا | مسألة قصة البقرة دليل على أن شرع من قبلنا شرع لنا | 74 | 75 | 76-77 | 78 | 79 | 80 | 81 | 82 | 83 | 84 | 85-86 | 87 | 88 | 89 | 90 | 91 | 92 | 93 | 94 | 95 | 96 | 97 | 98 | 99 | 100 | 101 | 102 | 103 | 104 | 105 | 106 | 107 | الآبة رقم 108 | 109 | 110 | 111-112 | 113 | 114 | 115 | 116 | 117 | 118 | 119 | 120 | الآيات رقم 121-123 | 124 | 125 | 126 | 127 | 128 | 129 | 130 | 131 | 132 | 133 | 134 | 135 | 136 | 137 | 138 | 139 | 140 | 141 | 142 | 143 | 144 | 145 | 146 | 147 | 148 | 149-150 | 151 | 152 | 153 | 154 | 155 | 156-157 | 158 | 159 | 160 | 161 | 162 | 163 | 164 | 165 | 166 | 167 | 168 | 169 | 170 | مسألة قول العلماء قوة ألفاظ هذه الآية تعطي إبطال التقليد | 171 | 172 | 173 | 174 | 175 | 176 | 177 | 178 | 179 | 180 | 181 | 182 | 183 | 184 | 185 | 186 | 187 | 188 | 189 | 190 | 191: 192 | 193 | 194 | 195 | 196 | 197 | 198 | 199 | 200 | 201 | 202 | 203 | 204 | 205 | 206 | 207 | 208 | 209 | 210 | 211 | 212 | 213 | 214 | 215 | 216 | 217 | 218 | 219 | 220 | 221 | 222 | 223 | 224 | 225 | 226-227 | 228 | 229 | 230 | 231 | 232 | 233 | 234 | 235 | 236 | 237 | 238 | 239 | 240 | 241-242 | 243 | 244 | 245 | 246 | 247 | 248 | 249 | 250 | 251 | 252 | 253 | الآية رقم254 | 255 | 256 | 257 | 258 | 259 | 260 | 261 | 262 | 263 | 264 | 265 | 266 | 267 | 268 | 269 | 270 | 271 | 272 | 273 | 274 | الآيات رقم 275-279 | 280 | 281 | 282 | 283 | 284 | 285-286