الجامع لأحكام القرآن/سورة البقرة/الآية رقم 131

من ويكي مصدر، المكتبة الحرة
اذهب إلى التنقل اذهب إلى البحث
الجامع لأحكام القرآنسورة البقرة
الآية رقم 131
القرطبي


الآية رقم 131


الآية: 131 { إِذْ قَالَ لَهُ رَبُّهُ أَسْلِمْ قَالَ أَسْلَمْتُ لِرَبِّ الْعَالَمِينَ }

العامل في "إذ" قوله: "اصطفيناه" أي اصطفيناه إذ قال له ربه أسلم. وكان هذا القول من الله تعالى حين ابتلاه بالكوكب والقمر والشمس. قال ابن كيسان والكلبي: أي أخلص دينك لله بالتوحيد. وقيل: اخضع واخشع. وقال ابن عباس: إنما قال له ذلك حين خرج من السرب، على ما يأتي ذكره في "الأنعام". والإسلام هنا على أتم وجوهه. والإسلام في كلام العرب: الخضوع والانقياد للمستسلم. وليس كل إسلام إيمانا، وكل إيمان إسلام، لأن من آمن بالله فقد استسلم وانقاد لله. وليس كل من أسلم آمن بالله، لأنه قد يتكلم فزعا من السيف، ولا يكون ذلك إيمانا، خلافا للقدرية والخوارج حيث قالوا: إن الإسلام هو الإيمان، فكل مؤمن مسلم، وكل مسلم مؤمن، لقوله: { إِنَّ الدِّينَ عِنْدَ اللَّهِ الأِسْلامُ } [1] فدل على أن الإسلام هو الدين، وأن من ليس بمسلم فليس بمؤمن. ودليلنا قوله تعالى: { قَالَتِ الأَعْرَابُ آمَنَّا قُلْ لَمْ تُؤْمِنُوا وَلَكِنْ قُولُوا أَسْلَمْنَا } [2] الآية. فأخبر الله تعالى أنه ليس كل من أسلم مؤمنا، فدل على أنه ليس كل مسلم مؤمنا، وقال ﷺ لسعد بن أبي وقاص لما قال له: اعط فلانا فإنه مؤمن، فقال النبي ﷺ: "أو مسلم" الحديث، خرجه مسلم، فدل على أن الإيمان ليس الإسلام، فإن الإيمان باطن، والإسلام ظاهر، وهذا بين. وقد يطلق الإيمان بمعنى الإسلام، والإسلام ويراد به الإيمان، للزوم أحدهما الآخر وصدوره عنه، كالإسلام الذي هو ثمرة الإيمان ودلالة على صحته، فاعلمه. وبالله التوفيق.

هامش

  1. [آل عمران: 19]
  2. [الحجرات: 14]
الجامع لأحكام القرآن - سورة البقرة
مقدمة السورة | 1 | 2 | 3 | أقوال العلماء في حكم الجلوس الأخير في الصلاة | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | أقوال العلماء في إمساك النبي عن قتل المنافقين | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | الآية رقم21 | 22 | 23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 | طرق ما يكون به الإمام إماما | شرائط الإمام | 31 | 32 | 33 | 34 | 35 | 36 | 37 | 38 | 39 | 40 | 41 | 42 | 43 | 44 | 45 | 46 | 47 | 48 | 49 | 50 | مسألة الاختلاف في يوم عاشوراء | فضل صيام يوم عاشوراء | 51 | 52 | 53 | 54 | 55 | 56 | 57 | 58 | 59 | 60 | 61 | 62 | 63 | القول في سبب رفع الطور | 64 | 65 | 66 | 67 | مسألة الدليل على منع الاستهزاء بدين الله ودين المسلمين ومن يجب تعظيمه | 68 | 69 | 70 | 71 | مسألة الدليل على حصر الحيوان بصفاته وجواز السلم فيه بذلك | 72 | 73 | مسألة القول بالقسامة بقول المقتول دمي عند فلان أو فلان قتلني | مسألة اختلاف العلماء في الحكم بالقسامة | مسألة الاختلاف في وجوب القود بالقسامة | مسألة الموجب للقسامة اللوث ولا بد منه | مسألة الاختلاف في القتيل بوجد في المحلة التي أكراها أربابها | مسألة لا يحلف في القسامة أقل من خمسين يمينا | مسألة قصة البقرة دليل على أن شرع من قبلنا شرع لنا | 74 | 75 | 76-77 | 78 | 79 | 80 | 81 | 82 | 83 | 84 | 85-86 | 87 | 88 | 89 | 90 | 91 | 92 | 93 | 94 | 95 | 96 | 97 | 98 | 99 | 100 | 101 | 102 | 103 | 104 | 105 | 106 | 107 | الآبة رقم 108 | 109 | 110 | 111-112 | 113 | 114 | 115 | 116 | 117 | 118 | 119 | 120 | الآيات رقم 121-123 | 124 | 125 | 126 | 127 | 128 | 129 | 130 | 131 | 132 | 133 | 134 | 135 | 136 | 137 | 138 | 139 | 140 | 141 | 142 | 143 | 144 | 145 | 146 | 147 | 148 | 149-150 | 151 | 152 | 153 | 154 | 155 | 156-157 | 158 | 159 | 160 | 161 | 162 | 163 | 164 | 165 | 166 | 167 | 168 | 169 | 170 | مسألة قول العلماء قوة ألفاظ هذه الآية تعطي إبطال التقليد | 171 | 172 | 173 | 174 | 175 | 176 | 177 | 178 | 179 | 180 | 181 | 182 | 183 | 184 | 185 | 186 | 187 | 188 | 189 | 190 | 191: 192 | 193 | 194 | 195 | 196 | 197 | 198 | 199 | 200 | 201 | 202 | 203 | 204 | 205 | 206 | 207 | 208 | 209 | 210 | 211 | 212 | 213 | 214 | 215 | 216 | 217 | 218 | 219 | 220 | 221 | 222 | 223 | 224 | 225 | 226-227 | 228 | 229 | 230 | 231 | 232 | 233 | 234 | 235 | 236 | 237 | 238 | 239 | 240 | 241-242 | 243 | 244 | 245 | 246 | 247 | 248 | 249 | 250 | 251 | 252 | 253 | الآية رقم254 | 255 | 256 | 257 | 258 | 259 | 260 | 261 | 262 | 263 | 264 | 265 | 266 | 267 | 268 | 269 | 270 | 271 | 272 | 273 | 274 | الآيات رقم 275-279 | 280 | 281 | 282 | 283 | 284 | 285-286