الجامع لأحكام القرآن/سورة البقرة/الآية رقم 136

من ويكي مصدر، المكتبة الحرة
اذهب إلى التنقل اذهب إلى البحث
الجامع لأحكام القرآنسورة البقرة
الآية رقم 136
القرطبي


الآية رقم 136


الآية: 136 { قُولُوا آمَنَّا بِاللَّهِ وَمَا أُنْزِلَ إِلَيْنَا وَمَا أُنْزِلَ إِلَى إِبْرَاهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالأَسْبَاطِ وَمَا أُوتِيَ مُوسَى وَعِيسَى وَمَا أُوتِيَ النَّبِيُّونَ مِنْ رَبِّهِمْ لا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِنْهُمْ وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ }

قوله تعالى: { قُولُوا آمَنَّا بِاللَّهِ } خرج البخاري عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: كان أهل الكتاب يقرؤون التوراة بالعبرانية ويفسرونها بالعربية لأهل الإسلام، فقال رسول الله ﷺ: "لا تصدقوا أهل الكتاب ولا تكذبوهم وقولوا آمنا بالله وما أنزل" الآية. وقال محمد بن سيرين: إذا قيل لك أنت مؤمن؟ فقل: { قُولُوا آمَنَّا بِاللَّهِ وَمَا أُنْزِلَ إِلَيْنَا وَمَا أُنْزِلَ إِلَى إِبْرَاهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ } الآية. وكره أكثر السلف أن يقول الرجل: أنا مؤمن حقا، وسيأتي بيانه في "الأنفال" إن شاء الله تعالى. وسئل بعض المتقدمين عن رجل قيل له: أتؤمن بفلان النبي، فسماه باسم لم يعرفه، فلو قال نعم، فلعله لم يكن نبيا، فقد شهد بالنبوة لغير نبي، ولو قال لا، فلعله نبي، فقد جحد نبيا من الأنبياء، فكيف يصنع؟ فقال: ينبغي أن يقول: إن كان نبيا فقد آمنت به. والخطاب في هذه الآية لهذه الأمة، علمهم الإيمان. قال ابن عباس: جاء نفر من اليهود إلى النبي ﷺ فسألوه عمن يؤمن به من الأنبياء، فنزلت الآية. فلما جاء ذكر عيسى قالوا: لا نؤمن بعيسى ولا من آمن به قوله تعالى: { قُولُوا آمَنَّا بِاللَّهِ وَمَا أُنْزِلَ إِلَيْنَا وَمَا أُنْزِلَ إِلَى إِبْرَاهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالأَسْبَاطِ } جمع إبراهيم براهيم، وإسماعيل سماعيل، قاله الخليل وسيبويه، وقال الكوفيون، وحكوا براهمة وسماعلة، وحكوا براهم وسماعل. قال محمد بن يزيد: هذا غلط، لأن الهمزة ليس هذا موضع زيادتها، ولكن أقول: أباره وأسامع، ويجوز أباريه وأساميع. وأجاز أحمد بن يحيى براه، كما يقال في التصغير بريه. وجمع إسحاق أساحيق، وحكى الكوفيون أساحقة وأساحق، وكذا يعقوب ويعاقيب، ويعاقبة ويعاقب. قال النحاس: فأما إسرائيل فلا نعلم أحدا يجيز حذف الهمزة من أوله، وإنما يقال أساريل، وحكى الكوفيون أسارلة وأسارل.

والباب في هذا كله أن يجمع مسلما فيقال: إبراهيمون وإسحاقون ويعقوبون، والمسلم لا عمل فيه والأسباط: ولد يعقوب عليه السلام، وهم اثنا عشر ولدا، ولد لكل واحد منهم أمة من الناس، واحدهم سبط. والسبط في بني إسرائيل بمنزلة القبيلة في ولد إسماعيل. وسموا الأسباط من السبط وهو التتابع، فهم جماعة متتابعون. وقيل: أصله من السبط "بالتحريك" وهو الشجر، أي هم في الكثرة بمنزلة الشجر، الواحدة سبطة. قال أبو إسحاق الزجاج: ويبين لك هذا ما حدثنا به محمد بن جعفر الأنباري قال حدثنا أبو نجيد الدقاق قال حدثنا الأسود بن عامر قال حدثنا إسرائيل عن سماك عن عكرمة عن ابن عباس قال: كل الأنبياء من بني إسرائيل إلا عشرة: نوحا وشعيبا وهودا وصالحا ولوطا وإبراهيم وإسحاق ويعقوب وإسماعيل ومحمدا ﷺ ولم يكن أحد له اسمان إلا عيسى ويعقوب. والسبط: الجماعة والقبيلة الراجعون إلى أصل واحد وشعر سبط وسبط: غير جعد. { لا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِنْهُمْ } قال الفراء: أي لا نؤمن ببعضهم ونكفر ببعضهم كما فعلت اليهود والنصارى.

هامش


الجامع لأحكام القرآن - سورة البقرة
مقدمة السورة | 1 | 2 | 3 | أقوال العلماء في حكم الجلوس الأخير في الصلاة | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | أقوال العلماء في إمساك النبي عن قتل المنافقين | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | الآية رقم21 | 22 | 23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 | طرق ما يكون به الإمام إماما | شرائط الإمام | 31 | 32 | 33 | 34 | 35 | 36 | 37 | 38 | 39 | 40 | 41 | 42 | 43 | 44 | 45 | 46 | 47 | 48 | 49 | 50 | مسألة الاختلاف في يوم عاشوراء | فضل صيام يوم عاشوراء | 51 | 52 | 53 | 54 | 55 | 56 | 57 | 58 | 59 | 60 | 61 | 62 | 63 | القول في سبب رفع الطور | 64 | 65 | 66 | 67 | مسألة الدليل على منع الاستهزاء بدين الله ودين المسلمين ومن يجب تعظيمه | 68 | 69 | 70 | 71 | مسألة الدليل على حصر الحيوان بصفاته وجواز السلم فيه بذلك | 72 | 73 | مسألة القول بالقسامة بقول المقتول دمي عند فلان أو فلان قتلني | مسألة اختلاف العلماء في الحكم بالقسامة | مسألة الاختلاف في وجوب القود بالقسامة | مسألة الموجب للقسامة اللوث ولا بد منه | مسألة الاختلاف في القتيل بوجد في المحلة التي أكراها أربابها | مسألة لا يحلف في القسامة أقل من خمسين يمينا | مسألة قصة البقرة دليل على أن شرع من قبلنا شرع لنا | 74 | 75 | 76-77 | 78 | 79 | 80 | 81 | 82 | 83 | 84 | 85-86 | 87 | 88 | 89 | 90 | 91 | 92 | 93 | 94 | 95 | 96 | 97 | 98 | 99 | 100 | 101 | 102 | 103 | 104 | 105 | 106 | 107 | الآبة رقم 108 | 109 | 110 | 111-112 | 113 | 114 | 115 | 116 | 117 | 118 | 119 | 120 | الآيات رقم 121-123 | 124 | 125 | 126 | 127 | 128 | 129 | 130 | 131 | 132 | 133 | 134 | 135 | 136 | 137 | 138 | 139 | 140 | 141 | 142 | 143 | 144 | 145 | 146 | 147 | 148 | 149-150 | 151 | 152 | 153 | 154 | 155 | 156-157 | 158 | 159 | 160 | 161 | 162 | 163 | 164 | 165 | 166 | 167 | 168 | 169 | 170 | مسألة قول العلماء قوة ألفاظ هذه الآية تعطي إبطال التقليد | 171 | 172 | 173 | 174 | 175 | 176 | 177 | 178 | 179 | 180 | 181 | 182 | 183 | 184 | 185 | 186 | 187 | 188 | 189 | 190 | 191: 192 | 193 | 194 | 195 | 196 | 197 | 198 | 199 | 200 | 201 | 202 | 203 | 204 | 205 | 206 | 207 | 208 | 209 | 210 | 211 | 212 | 213 | 214 | 215 | 216 | 217 | 218 | 219 | 220 | 221 | 222 | 223 | 224 | 225 | 226-227 | 228 | 229 | 230 | 231 | 232 | 233 | 234 | 235 | 236 | 237 | 238 | 239 | 240 | 241-242 | 243 | 244 | 245 | 246 | 247 | 248 | 249 | 250 | 251 | 252 | 253 | الآية رقم254 | 255 | 256 | 257 | 258 | 259 | 260 | 261 | 262 | 263 | 264 | 265 | 266 | 267 | 268 | 269 | 270 | 271 | 272 | 273 | 274 | الآيات رقم 275-279 | 280 | 281 | 282 | 283 | 284 | 285-286