الجامع لأحكام القرآن/سورة البقرة/الآية رقم 208

من ويكي مصدر، المكتبة الحرة
اذهب إلى التنقل اذهب إلى البحث
الجامع لأحكام القرآنسورة البقرة
الآية رقم 208
القرطبي


الآية رقم 208


الآية: 208 { يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا ادْخُلُوا فِي السِّلْمِ كَافَّةً وَلا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ إِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُبِينٌ }

لما بين الله سبحانه الناس إلى مؤمن وكافر ومنافق فقال: كونوا على ملة واحدة، واجتمعوا على الإسلام واثبتوا عليه. فالسلم هنا بمعنى الإسلام، قال مجاهد، ورواه أبو مالك عن ابن عباس. ومنه قول الشاعر الكندي:

دعوت عشيرتي للسلم لما... رأيتهم تولوا مدبرينا

أي إلى الإسلام لما ارتدت كندة بعد وفاة النبي ﷺ مع الأشعث بن قيس الكندي، ولأن المؤمنين لم يؤمروا قط بالدخول في المسالمة التي هي الصلح، وإنما قيل للنبي ﷺ أن يجنح للسلم إذا جنحوا له، وأما أن يبتدئ بها فلا، قاله الطبري. وقيل: أمر من آمن بأفواههم أن يدخلوا فيه بقلوبهم. وقال طاوس ومجاهد: ادخلوا في أمر الدين. سفيان الثوري: في أنواع البر كلها. وقرئ "السلم" بكسر السين.

قال الكسائي: السِّلم والسَّلم بمعنى واحد، وكذا هو عند أكثر البصريين، وهما جميعا يقعان للإسلام والمسالمة. وفرق أبو عمرو بن العلاء بينهما، فقرأههنا: "ادخلوا في السلم" وقال هو الإسلام. وقرأ التي في "الأنفال" والتي في سورة "محمد" ﷺ "السلم" بفتح السين، وقال: هي بالفتح المسالمة. وأنكر المبرد هذه التفرقة. وقال عاصم الجحدري: السلم الإسلام، والسلم الصلح، والسلم الاستسلام. وأنكر محمد بن يزيد هذه التفريقات وقال: اللغة لا تؤخذ هكذا، وإنما تؤخذ بالسماع لا بالقياس، ويحتاج من فرق إلى دليل. وقد حكى البصريون: بنو فلان سلم وسلم وسلم، بمعنى واحد. قال الجوهري: والسلم الصلح، يفتح ويكسر، ويذكر ويؤنث، وأصله من الاستسلام والانقياد، ولذلك قيل للصلح: سلم. قال زهير:

وقد قلتما إن ندرك السلم واسعا... بمال ومعروف من الأمر نسلم

ورجح الطبري حمل اللفظة على معنى الإسلام بما تقدم. وقال حذيفة بن اليمان في هذه الآية: الإسلام ثمانية أسهم، الصلاة سهم، والزكاة سهم، والصوم سهم، والحج سهم، والعمرة سهم، والجهاد سهم، والأمر بالمعروف سهم، والنهي عن المنكر سهم، وقد خاب من لا سهم له في الإسلام. وقال ابن عباس: "نزلت الآية في أهل الكتاب، والمعنى، يا أيها الذين آمنوا بموسى وعيسى ادخلوا في الإسلام بمحمد ﷺ كافة". وفي صحيح مسلم عن أبي هريرة عن رسول الله ﷺ قال: "والذي نفس محمد بيده لا يسمع بي أحد من هذه الأمة يهودي ولا نصراني ثم يموت ولم يؤمن، بالذي أرسلت به إلا كان من أصحاب النار". و"كافة" معناه جميعا، فهو نصب على الحال من السلم أو من ضمير المؤمنين، وهو مشتق من قولهم: كففت أي منعت، أي لا يمتنع منكم أحد من الدخول في الإسلام. والكف المنع، ومنه كفة القميص - بالضم - لأنها تمنع الثوب من الانتشار، ومنه كفة الميزان - بالكسر - التي تجمع الموزون وتمنعه أن ينتشر، ومنه كف الإنسان الذي يجمع منافعه ومضاره، وكل مستدير كفة، وكل مستطيل كفة. ورجل مكفوف البصر، أي منع عن النظر، فالجماعة تسمى كافة لامتناعهم عن التفرق. { وَلا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ } { وَلا تَتَّبِعُوا } نهي. { خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ } مفعول، وقد تقدم. وقال مقاتل: استأذن عبدالله بن سلام وأصحابه بأن يقرؤوا التوراة في الصلاة، وأن يعملوا ببعض ما في التوراة، فنزلت. { وَلا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ } فإن اتباع السنة أولى بعد ما بعث محمد ﷺ من خطوات الشيطان. وقيل: لا تسلكوا الطريق الذي يدعوكم إليه الشيطان. { إنه لكم عدو مبين } ظاهر العداوة، وقد تقدم.

هامش


الجامع لأحكام القرآن - سورة البقرة
مقدمة السورة | 1 | 2 | 3 | أقوال العلماء في حكم الجلوس الأخير في الصلاة | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | أقوال العلماء في إمساك النبي عن قتل المنافقين | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | الآية رقم21 | 22 | 23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 | طرق ما يكون به الإمام إماما | شرائط الإمام | 31 | 32 | 33 | 34 | 35 | 36 | 37 | 38 | 39 | 40 | 41 | 42 | 43 | 44 | 45 | 46 | 47 | 48 | 49 | 50 | مسألة الاختلاف في يوم عاشوراء | فضل صيام يوم عاشوراء | 51 | 52 | 53 | 54 | 55 | 56 | 57 | 58 | 59 | 60 | 61 | 62 | 63 | القول في سبب رفع الطور | 64 | 65 | 66 | 67 | مسألة الدليل على منع الاستهزاء بدين الله ودين المسلمين ومن يجب تعظيمه | 68 | 69 | 70 | 71 | مسألة الدليل على حصر الحيوان بصفاته وجواز السلم فيه بذلك | 72 | 73 | مسألة القول بالقسامة بقول المقتول دمي عند فلان أو فلان قتلني | مسألة اختلاف العلماء في الحكم بالقسامة | مسألة الاختلاف في وجوب القود بالقسامة | مسألة الموجب للقسامة اللوث ولا بد منه | مسألة الاختلاف في القتيل بوجد في المحلة التي أكراها أربابها | مسألة لا يحلف في القسامة أقل من خمسين يمينا | مسألة قصة البقرة دليل على أن شرع من قبلنا شرع لنا | 74 | 75 | 76-77 | 78 | 79 | 80 | 81 | 82 | 83 | 84 | 85-86 | 87 | 88 | 89 | 90 | 91 | 92 | 93 | 94 | 95 | 96 | 97 | 98 | 99 | 100 | 101 | 102 | 103 | 104 | 105 | 106 | 107 | الآبة رقم 108 | 109 | 110 | 111-112 | 113 | 114 | 115 | 116 | 117 | 118 | 119 | 120 | الآيات رقم 121-123 | 124 | 125 | 126 | 127 | 128 | 129 | 130 | 131 | 132 | 133 | 134 | 135 | 136 | 137 | 138 | 139 | 140 | 141 | 142 | 143 | 144 | 145 | 146 | 147 | 148 | 149-150 | 151 | 152 | 153 | 154 | 155 | 156-157 | 158 | 159 | 160 | 161 | 162 | 163 | 164 | 165 | 166 | 167 | 168 | 169 | 170 | مسألة قول العلماء قوة ألفاظ هذه الآية تعطي إبطال التقليد | 171 | 172 | 173 | 174 | 175 | 176 | 177 | 178 | 179 | 180 | 181 | 182 | 183 | 184 | 185 | 186 | 187 | 188 | 189 | 190 | 191: 192 | 193 | 194 | 195 | 196 | 197 | 198 | 199 | 200 | 201 | 202 | 203 | 204 | 205 | 206 | 207 | 208 | 209 | 210 | 211 | 212 | 213 | 214 | 215 | 216 | 217 | 218 | 219 | 220 | 221 | 222 | 223 | 224 | 225 | 226-227 | 228 | 229 | 230 | 231 | 232 | 233 | 234 | 235 | 236 | 237 | 238 | 239 | 240 | 241-242 | 243 | 244 | 245 | 246 | 247 | 248 | 249 | 250 | 251 | 252 | 253 | الآية رقم254 | 255 | 256 | 257 | 258 | 259 | 260 | 261 | 262 | 263 | 264 | 265 | 266 | 267 | 268 | 269 | 270 | 271 | 272 | 273 | 274 | الآيات رقم 275-279 | 280 | 281 | 282 | 283 | 284 | 285-286